Saturday, 25 July 2020

अव्यय


संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया ओर विशेषण शब्दों मे लिंग, वचन ओर कारक के अनुसार परिवर्तन हॊता है। इसलिए संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया ओर विशेषण विकारी शब्द कहलाते है।

 

जिन शब्दों पर लिंग, वचन ओर काल का प्रभाव नहीं पडता अर्थात जिन शब्दों में कभी कोई परिवर्तन नहीं होता उन्हे अव्यय कहते हैं। अव्यय अविकारी शब्द हैं।

  • अव्यय के प्रकार -
  1. क्रियाविशेषण अव्यय
  2. समुच्चयबोधक अव्यय
  3. संबंधबोधक अव्यय
  4. विस्मयादिबोधक अव्यय।

 

  1. क्रियाविशेषण अव्यय - क्रिया की रीति, क्रिया का स्थान, क्रिया का काल और क्रिया का  परिमाण बताने वाले शब्द 'क्रियाविशेषण अव्यय' है
    • कुछ क्रियाविशेषण अव्ययों का परिचय -

1 क्रिया की रीति बताने वाले अव्यय: तेज, धीरे-धीरे, अचानक, एकाएक, आदी ।

2 क्रिया का स्थान बताने वाले अव्यय: बाहर, भीतर, ऊपर, नीचे, यहा, वहा, इधर, उदर आदि। 

3 क्रिया का काल बताने वाले अव्यय: आज, कल, देर से, जल्दी, प्रया:, कभी-कभी, अब, अभी तक आदि।

4 क्रिया का परिमाण बताने वाले अव्यय : कम, अधिक, ज्यादा, काफी, बहुत, थोड़ा, पर्याप्त आदी ।

 

  1. समुच्चयबोधक अव्यय - दो स्वतंत्र वाक्यों या शब्दों को जोड़ने वाले अव्ययों को 'समुच्चयबोधक अव्यय' कहते है।
    • कुछ समुच्चयबोधक अव्यय : किंतु, लेकिन, बल्कि, फिर, फिर भी, क्योंकि, इसलिए, नहीं तो, वरना आदी।

 

  1. संबंधबोधक अव्यय - जो अव्यय संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ आकार उनका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से जोड़ते है, उन्हे 'संबंधबोधक अव्यय' कहते है।
    • जैसे - के साथ, के सामने, की भति, के आगे यदि।  

 

  1. विस्मयादिबोधक अव्यय - विस्मय, प्रशंसा, घृणा, शोक, चेतावनी आदी भावों को प्रकट करने वाले अव्ययों को 'विस्मयादिबोधक अव्यय' कहते है।
    • जैसे - हाय , है राम, ओह, राम-राम, धत, शाबाश,बाप रे आदी।

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